Showing posts with label Editor Choice. Show all posts
Showing posts with label Editor Choice. Show all posts
Friday, March 3, 2017
Wednesday, November 2, 2016
Wednesday, October 5, 2016
Monday, June 13, 2016
Thursday, February 25, 2016
आप जितना चालाक हों, समझ लो आप उतना अपने से अंजान हों
आप जितना चालाक हों
समझ लो आप उतना अपने से अंजान हों
Tuesday, December 15, 2015
Tuesday, November 3, 2015
Tuesday, October 27, 2015
इस उम्मीद से मत फिसलो
इस उम्मीद से मत फिसलो
कि तुम्हें कोई उठा लेगा!!
सोच कर मत डूबो दरिया में
कि तुम्हें कोई बचा लेगा!!
ये दुनिया तो एक अड्डा है
तमाशबीनों का दोस्तों!!
अगर देखा तुम्हें मुसीबत में तो
Wednesday, March 11, 2015
Spiritual Words by Osho
ज्ञान दो प्रकार का है; विषयगत ज्ञान और आत्मगत ज्ञान। एक तो विषय का ज्ञान है और दूसरा स्वयं का ज्ञान है।
और कोई आदमी चाहे लाखों चीजें जान ले। चाहे वह पूरे जगत को जान ले। लेकिन अगर वह स्वयं को नहीं जानता है तो वह अज्ञानी है।
वह जानकार हो सकता है। पंडित हो सकता है। लेकिन वह प्रज्ञावान नहीं है। संभव है कि वह बहुत जानकारी इकट्ठी कर ले। बहुत ज्ञान इकट्ठा कर ले, लेकिन उसके पास उस बुनियादी चीज का अभाव है जो किसी को प्रज्ञावान बनाता है। वह स्वयं को नहीं जानता है। ~ ओशो
Subscribe to:
Posts (Atom)







